क्यों खास है चन्द्रवनी गौतम कुण्ड का बैसाखी मेला ?जाने इस रिपोर्ट में।

भानु प्रकाश नेगी,देहरादून
अपनी विविध संस्कृति व मेले उत्सवों के लिए देश और दुनियां विख्यात उत्तराखंड में ऐसी कोई ऋतु नहीं आती जिसमें कोई मेला या उत्सव नहीं होता है। इन मेलां व उत्सवों का अपने आप में खास महत्व होता है। फसल काटने की खुशी में किसानों द्वारा  मनाये जाने वाला बैसाखी मेला देश भर में हर साल मनाया जाता है लेकिन चन्द्रवनी मोहब्बेवाला में लगने वाला यह बैसाखी मेला अपने आप में खास बात को लेकर मनाया जाता है। क्या है चन्द्रबनी बैसाखी मेला का महत्व।
चन्द्रवनी मोहब्बेवाला स्थित यह कुंड कोई साधारण कुंड नहीं है बल्कि धरती से निकलने वाली मां गंगा का जल है। गौतम कुण्ड चन्द्रबनी का इतिहास लगभग अड़तीस लाख तिरानवें हजार एक सौ नौ वर्ष  पुराना है। लोक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में देवराज इन्द्र को चुने जाने के लिए देवताओं की सभा हुई थी,महर्षि गौतम ने पत्नी अहिल्या व पुत्री अंजना के साथ यहां बारह वर्ष तक तपस्या की थी। इस तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा यहां प्रकट हुई थी।
हर साल बैसाखी को मनाये जाने वाले इस मेले में लोग देश के कोने कोने से यहां पंहुचते है। साथ ही यहां पर कई प्रदेशों से मेले में सामन बेचने के लिए दुकानदार आते है।जिनके लिए समिति द्वारा कम किराये मे उचित व्यवस्था की जाती है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की माने तो आजकल की तेज रफतार जिन्दगी में मेलों का काफी महत्व बड गया है। जहां लोगों हसते खेलते अपने परिवार के साथ सकून के साथ तमाम प्रकार के मनोरंजनों से तनाव को दूर करते है। साथ इस मेले का महत्व इस लिए भी ज्यादा है कि किसान अपनी साल भर की मेहनत से अगाई गई फसल को काटता है जिसे खुसहाली का प्रतीक माना जाता है।मेले में शांति व सुरक्षा के भी उचित व्यवस्था होती है।
गौतम कुण्ड चन्द्रवनी में लगने वाला इस बैसाखी मेले का महत्व अन्य मेलों से काफी अलग है। इस मेले से जहां एक ओर गौतम ऋषि  व मां गंगा के अवतरण की कथा जुड़ी है, वहीं इस स्थान पर सतयुग में इन्द्र स्थापना के लिए देवताओं की सभा के आयोजन की कथा प्रचलित है।
 4 दिन तक चलने वाले इस मेले में दूर -दूर से आये भक्तों की मनोकामनायें भी पूर्ण होती है। भले ही जन प्रतिनिधियां द्वारा समय समय पर इस एतिहासिक स्थान के जीर्णोद्धार करने का प्रयास किया गया हो, लेकिन अभी तक पौराणिक स्थल को वो ख्याति नहीं मिल पाया है जिसका यह सच्चा हकदार है।