बोल्डिग स्कूलों की मनमानी से आखिर कब तक शर्मसार होना पडेगा अभिभावको को?

बोर्डिंग स्कूल में रेप, शिक्षा हब दून शर्मसार


– जीआरडी में हुए गैंग रेप के आरोपियों को बचाता रहा प्रबंधन
– प्रबंधक लता गुप्ता की कारिस्तानी, पीड़िता को गर्भपात की दवा खिलाती रही.


देहरादून में लगभग 25 हजार बच्चे देश के विभिन्न प्रांतों से शिक्षा ग्रहण करने के लिए आए हैं। अभिभावक अपने गाढ़े कमाई का एक बड़ा हिस्सा बोर्डिंग की फीस के तौर पर देते हैं। अमूमन देहरादून में एक बोर्डर से लगभग चार से पांच लाख रुपये सालभर लिए जाते हैं। सभी बोर्डर संपन्न घरों के होते हैं। अभिभावक यह सोचते हैं कि बोर्डर में डोम पेरेंट्स उनका उसी तरह से ध्यान रखते हैं जिस तरह से वो स्वयं रखते हैं। बात सही भी है। अधिकांश बोर्डिंग स्कूलों में हर बच्चे को एक छोटे ग्रुप में रखा जाता है। हर ग्रुप के लिए डोम पेरेंट्स होते हैं जो उनकी पढ़ाई, स्वास्थ्य, विहेवियर और हर छोटी-बड़ी जरूरतों का ध्यान रखते हैं। अहम बात यह है कि जीआरडी स्कूल की दसवीं कक्षा की जिस लड़की के साथ अन्य बोर्डरों ने गैंप रेप किया, जीआरडी प्रबंधन ने इसकी सूचना पीड़ित के परिजनों को नहीं दी। प्रबंधक लता गुप्ता वैसे भी स्कूल की लड़कियों के साथ बदतमीजी करने के लिए कुख्यात है। इस ग्रुप के देहरादून में कई स्कूल हैं। और मालिक राजा सिंह ने मैनेजर लता गुप्ता को पूरी व खुली छूट दी है। लता गुप्ता ने पूरे मामले को लीपा-पोती करने की कोशिश की और आरोपी छात्रों को अपने दूसरे स्कूल में शिफ्ट कर दिया। पीड़ित लड़की गर्भवती हो गयी तो उसको गर्भपात की दवा खिलाई। यह घटना अभिभावकों को चिन्ता में डालने वाली है। जीआरडी जैसे गु्रप ने स्कूल में न तो गार्ड ही रखे हैं और न ही वहां सीसीटीवी कैमरे। और भी कई लूप होल हैं। लेकिन शर्म वाली बात यह है कि लता गुप्ता जो खुद एक महिला हैं, एक लड़की के साथ हुए इस गैंगरेप को दबाने में जुटी रही। यह अधिक घातक बात है कि प्रबंधक और डायरेक्टर दोनों ने पुलिस या अभिभावकों को विश्वास में लेने की बजाए, ऐसी घटिया हरकत की। लता गुप्ता और राजा सिंह दोनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

-गुणानन्द जखमोला,वरिष्ठ पत्रकार