यहाँ सवालों के जवाब देते हैं शिव।

यहाँ सवालों के जवाब देते हैं शिव


केदारनाथ शैली का यह नवनिर्मित मंदिर विनसर महादेव का है, जो बडियारगढ़ के चिलेडी गांव में बने सदियों पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार कर बना है। विनसर यहाँ शिव रूप में पूजित है, जो कभी कुमाऊं से आया बताया जाता है।
विनसर देवता यहाँ घंटाकर्ण, हीत, क्षेत्रपाल आदि देवताओं की तरह आनुष्ठानिक पद्धति से पूजा जाता है और मनुष्यों पर अवतरित होकर पीड़ितों की विभिन्न समस्याओं का निराकरण करता है। वह लोगों के सवालों का जवाब देकर मार्गदर्शन करता है। यह शंकर भगवान् यहाँ वैदिक-पौराणिक नहीं, बल्कि विशुद्ध लौकिक है।
पहाड़ में देव पूजन की अनूठी पद्धति और संस्कृति है, जो यहाँ की प्राचीन जातियों की देन है। विनसर (वीणेश्वर) भगवान् भी उसी पद्धति से पूजे जाते हैं।
विनसर के उपासक गढ़वाल में नागराजा और घंटाकर्ण के उपासकों की तुलना में कम मिलते हैं। चिलेडी के साथ ही कांडा, रथेड़, सिरवाडी़, मणजूली, झनगुली, थाला, पाब, घंडियालधार, ग्वाड़ आदि गांवों के सैकड़ों परिवार एक निश्चित समयांतराल पर विशाल अनुष्ठान कर विनसर देवता की पूजा करते हैं, जो सामाजिक सहभागिता और सहकारिता की अनूठी मिसाल है। यह आस्था और आयोजन वर्षों से अलग-थलग रह रहे सहोदरों, बंधु-बांधवों, मित्रों और रिश्तेदारों की भेंट-मुलाकात का सर्वश्रेष्ठ माध्यम भी है।
पहले विनसर का मंदिर(मंडुला) बहुत छोटा था, जो पत्थर-मिट्टी से निर्मित था, किंतु कुछ पढे़-लिखे और समृद्ध लोगों की पहल और सहयोग से अब यहाँ भव्य मंदिर बना दिया गया है, जो पहली झलक में एकदम केदारनाथ मंदिर लगता है।
मैं 1987 से विनसर मेला का साक्षी बनता आ रहा हूँ, पर इस बार की व्यवस्थाओं से मन प्रसन्न हो गया। श्रद्धालुओं के बैठने, पूजा करने, शौचालय, आवागमन और मनोरंजक आदि की सुंदर व्यवस्था थी। इसका श्रेय सर्वश्री जगवीर सिंह रावत, उमेद सिंह पुंडीर, विजयसिंह बागड़ी, कुंदनसिंह रावत जैसे लोगों को जाना चाहिए ।
-डाॅ. वीरेंद्र बर्त्वाल, देवप्रयाग