शिक्षा विभाग की लापरवाही नमूना,पास होता छात्र तो बढ़ जाती मुस्किल.

शिक्षा विभाग एक और बडा कारनामा, छात्र की मार्कसीट ही उल्टी छाप दी

सरकारी शिक्षा का हालत प्रदेश में किस तरह से विगडती जा रही है यह बात किसी से छुपी नही है। आलम यह है कि उत्तीर्ण अनुर्तीण होने वाले छात्र छात्राओं की अंकतालिका भी सही तरीके से नही छापी जाती है। ऐसा ही एक मामला राजकीय इंटर कॉलेज नागनाथ पोखरी (चमोली) के हाईस्कूल मे पढने वाले छात्र सचिन चौधरी (पुत्र मंगल सिंह चौधरी) का समाने आया है। छात्र भले ही हाईस्कूल की परीक्षा में उत्तीर्ण नही हो पाया हो लेकिन अंकतालिका उल्टी यानी की पीछे के पेज में छाप दी गई है। जो पूर्णतः गलत है।


स्कूल के प्रधानचार्य ज्ञानी लाल सैलानी का कहना है कि यह मामला मेरे संज्ञान में है हमारे विद्यालय में दो छात्रों की अंकतालिका इसी तरह से उल्टी छपी है जो विभागीय गलती है, और यह प्रकरण नया नही है प्रदेश भर में इस तरह की कई मार्कसीट उल्टे पेज पर छाप जाती है। इस तरह की अंकतालिका को दुबारा संशोधन के लिए उत्तराखंड बोर्ड रामनगर भेज दिया जाता है। हमने अपने विद्यालय के छात्रों की अंकतालिका भी विभाग को भेज दी है। जो लगभग एक दो सप्ताह में संशोधित होकर वापस आ जाती है।

भले ही आज तक की सरकारें शिक्षा व्यवस्था के चाक चौबन्द करने का दावा करती आ रही हो लेकिन हकीकत सभी के सामने है।सूबे के शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डे भले ही शिक्षा विभाग को सुधारने के लिए कई तरह के फरमान(शिक्षक ड्रेसकोड,अनिवार्य तौर पर एनसीईआरटी की किताबें आदि) जारी कर चुके हो लेकिन हालत जस की तस बने हुये है, कभी शिक्षिका को गणित सीखने चले मंत्री जी खुद फंस जाते है तो कभी अन्य विबादों में। लेकिन शिक्षा विभाग की मूल-भूत समस्याओं पर किसी का ध्यान नही है। शिक्षा विभाग के हालत प्रदेश में किस तरह खराब है यह इस बात से समझा जा सकता है कि छात्र छात्राओं के भविष्य में सबसे अधिक महत्वपूर्ण माने जाने वाली अंकतालिका तक को सही नही छापा जा रहा है, शिक्षा व्यवस्था के क्या हालत होगें? सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

                 -भानु प्रकाश नेगी,देहरादून