जीवन को व्यवस्थित ढंग से जीने का सार है श्रीमद् भागवत कथा-आचार्य मनोज ढोड़ियाल.

देहरादून-भागवत कथा जीवन को व्यवस्थित ढंग से जीने शैली को बताता है।दिब्य भागवत कथा सिर्फ इसी कलिकाल में सुलभ है,जहांॅ मुनष्य द्वारा किए गये हर प्रकार के पापों का पश्च्याताप किया जा सकता है। जो मनुष्य भागवत कथा का ध्यान व नियमपूर्वक श्रवण करता तथा उसे अपने जीवन में उतारता है,उसके जीवन में आनन्द ही आनन्द होता है। उक्त कथन कथा व्यास आचार्य मनोज प्रसाद ढौडियाल ने मसन्दावाला (कोलागढ¬) में स्वा. कुवंर सिंह बिष्ट के वार्षिक श्राद्ध के अवसर पर आयोजित भागवत कथा के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि, आज के समय में समाज मे बैमनिष्यता बढ़ती जा रही है,जिससे मनुष्य अपने सद्मार्ग से भटकता जा रहा है।हमारी जैसी मानसिकता होती है,वैसे ही हम कर्म करते हैं।भागवत कथा हमारे कर्मो को सुधारती है।भागवत कथा से विमुख होने वाले धृणित व दूषित मानसिकता के लोग ही समाज में कुकृत्यों को अंजाम देते है।