अटल आयुषमान योजना में क्यों हैं उत्तराखंड के सरकारी अस्पताल फिसड्डी, जाने इस खास रिपोर्ट में!

अटल आयुषमान उत्तराखंड योजना के तहत एक लाख से अधिक लोगों का ईलाज किया जा चुका है। लेकिन इस योजना को फलीभूत करने के लिए सरकारी अस्पताल फिस्सडी नजर आ रहे हैं।

अटल आयुषमान उत्तराखंड योजना अपने लक्ष्य को पूरा कर रही है। इस योजना के तहत लाखों परिवारों को 5 लाख तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा दी जा रही है। प्रदेश भर में अभी तक इस योजना से डेढ़ लाख से अधिक लोगों का ईलाज किया जा चुका है। लेकिन प्राईवेट अस्पतालों की तुलना में सरकारी अस्पताल ईलाज नहीं दे पा रहे हैं। आईए ग्राफिक्स के जरिए बताते हैं आपको कि देहरादून के  किस अस्पतालों का क्या है स्कोर

— राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, अस्पताल — रोजाना 30 से 35 मामले, अभी तक साढ़े 6 हजार लोगों का किया गया ईलाज

— कोरोनेशन अस्पताल— रोजाना 20 से 25 मामले, अभी तक 2800 लोगों का ईलाज किया जा चुका है। और प्रत्येक दिन 7 से 8 मरीजों को अन्य अस्पतालों में रैफर किया जा रहा है।

— वहीं महंत इंद्रेश अस्पताल में रोजाना ओपीडी में 100 से ज्यादा और 30 से 40 मरीज एडमिट रोज होते हैं। वहीं अभी तक अस्पताल ने 16 हजार मरीजों का ईलाज कर दिया है।

 

सरकारी अस्पतालों में कम लोगों का ईलाज होना यह दर्शाता है कि लोग सरकारी अस्पतालों पर कम ही भरोसा करते हैं। जनता का कहना है कि इस योजना का सही लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकारी अस्पतालों की स्थिति ठीक नहीं है। सभी अस्पतालों को जोड़ने से ही यह योजना सफल हो पायेगी। वहीं जनता की मानें तो स्टाफ की कमी और पूरी तरह से सुविधाएं न मिलने के कारण मरीज प्राइवेट अस्पतालों की ओर भाग रहा है।

 

हालांकि सरकारी अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों का मानना है कि लोग सरकारी अस्पतालों में लगातार आ रहे हैं। लेकिन उनका भी मानना है कि अस्पताल में किसी मरीज के लिए किसी सामान की आवश्यकता होती है तो उसकी आपूर्ति करवा दी जाती है। वहीं मशीनों का जो टोटा है उसे 1 माह में दूर किया जायेगा। ताकि मरीजों को इसका लाभ दिलाया जा सके।

सरकारी अस्पताल से लगातार जनता के उठते भरोसे और सुविधाओं के अभाव में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि सरकार का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों की स्थिति में सुधार करना है, जिसे धीरे— धीरे दूर किया भी जा रहा है।

भले ही अटल आयुषमान योजना का लक्ष्य लोगों को ईलाज दिलाना हो। लेकिन इस योजना का लाभ दिलाने में सरकारी अस्पताल फिस्सडी नजर आ रहे हैं। हालांकि सरकार की मानें तो सरकारी अस्पतालों की स्थिति को सुधारने के लिए काम किया जा रहा है। लेकिन सरकारी अस्पतालों के हाल कब सुधरेंगें यह तो आने वाला वक्त ही बता पायेगा।

-पूर्णिमा मिश्रा