असम के मदरसों में क्या होता है?

सरकार के अनुसार, जो छात्र इस तरह की मज़हबी शिक्षा को लेकर भविष्य में ‘मुल्ला-मौलवी’ नहीं बनना चाहते उनका ध्यान रखते हुए इन मदरसों में सामान्य ज्ञान और अंग्रेज़ी जैसे ‘धर्मनिरपेक्ष’ विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात सोची जा रही है.

असम में दो तरह के मदरसे हैं. एक प्रोविंसिलाइज़्ड जो पूरी तरह सरकारी अनुदान से चलते हैं और दूसरा खेराजी जिसे निजी संगठन चलाते हैं. राज्य के मदरसा शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत 700 से ज़्यादा मदरसे हैं जबकि सरकार के पास खेराजी मदरसों की संख्या का सटीक आंकड़ा नहीं है. ऐसे में असम सरकार ने निजी संगठनों की ओर से चलाए जा रहे खेराजी मदरसों के लिए पंजीकरण अनिवार्य करने की योजना तैयार की है.

हालांकि, मदरसों को लेकर सरकार के इस क़दम को हस्तक्षेप की तरह देखा जा रहा है और मुस्लिम समुदाय के लोग इससे नाराज़ हैं. मदरसों में आधुनिक शिक्षा के नाम पर बीजेपी सरकार के इन ‘नेक’ इरादों को मुस्लिम समुदाय के लोग विश्वास की नज़र से नहीं देख पा रहे हैं.

जहां तक मदरसों में इस्लाम की तालीम ले रहे बच्चों की बात है तो उनसे मिलने के बाद ऐसा नहीं लगता कि वे आम स्कूलों में पढ़ रहे अन्य बच्चों से कुछ अलग सोच रखते हैं. क्योंकि अकसर ऐसी बातें सामने आती रही हैं कि धार्मिक शिक्षा लेने के कारण ये बच्चे समाज की मुख्यधारा से कट जाते हैं.