मछलियों का खूबसूरत संसार कर रहा है दून ज़ू मैं आप का इंतजार.

भानु प्रकाश नेगी

गर्मियों की छुट्टियों पड़तें ही पर्यटक स्थलों पर शैलानियों का जमावड़ा देखने को मिल रहा है।ऐसे मे चारधाम यात्रा से लेकर मसूरी आदि स्थलों पर पर्यटक सैर सपाटे के लिए आ रहे है।लेकिन इस सब स्थलों में आजकल देहरादून राजपुर रोड़ स्थित जू  में बने एक्ेटिक वर्ड पर्यटकों की पहली पसंद बनी हुई है।


जल की रानी मछली हर किसी के मन को भा जाती है, और अगर वह रंग बिरंगी और विभिन्न प्रकार की प्रजाति की हो तो अति आर्कषण और बड़ जाता है।देहरादून स्थित जू में बने इस खूबसूरत एक्वाईड वर्ड में जो भी शैलानी धूमने आता है वह इसकी तारिफ करते नहीं थकता है। एक्वेरियमों में सजी मछलियां को देखकर बच्चों की खुशी का तो ठिकाना ही नहीं रहता।दिल्ली से देहरादून जू में घूमने आई सुनिधि कहती है कि हमने यहां  बहुत सारी मछली देखी परन्तु हमें पता ही नहीं था कि यहां  इतनी बैरायटी की मछलियां रहती है।

एक्वेटिक्ड वर्ड में जाने के लिए पर्यटकों के यहां पर मामूली शुल्क लिया जाता है। मछलियों की इस खूबसूरत दुनियों को देखने के लिए  देशभर के पर्यटक यहां आ रहे है। वहीं इस एक्वेडिट वर्ड को डब्लप कराने वाले वन अधिकारी का कहना है कि इस एक्वेरियम में 40 से 45 प्रजाति की मछलियों को रखा गया है,जिसमें 4 टैंकों में समुद्री मछलियों है।इस एक्वाईट की सजावट और मछलियों के रख रखाव के लिए कई कर्मचारियों को तैनात किया गया है।यह विभाग की आय का जरिया भी है।

जू में आने वाले यात्रियों की तादात लगातार बड़ती जा रही है।वन अधिकारियों की माने तो इस जू से लगभग 2 करोड़ रूपये की आय  प्रतिमाह वन विभाग को होती है। और औसतन 70 हजार पर्यटक इस पार्क में धूमने आता है।पार्क में साफ सफाई की विशेष व्यवस्था की गई है। जिसमें प्लास्टिक की बोतल पर पार्क में जाने से पहले स्टीकर लगाकर 10 रूपये शुल्क जमा कराया जाता है। अगर बोतल वापस आ जाती है। तो काउटर से पैसा वापस किया जाता है। इस कचरे से पहाडियों का निर्माण किया जाता है। जिसमें पर्यटक फोटो आदि का जमकर लुफ्त लेते है।इसके अलावा प्लास्टिक बोतलों के कचरे को साफ करने के लिए क्रेस मशीन भी यहां पर लगाई गई है।

-देश और प्रदेश के पर्यटकों के लिए आर्कषण का केन्द्र बना यह  एकवाईड केन्द्र जहां हर पर्यटक की वाह वाही लूट रहा हैं वहीं वन महकमें की आय का भी जरिया बनता जा रहा है।पर्यटन के लिए प्रसिद्व उत्तराखंड में कास इसी तरह के स्थलों को डब्लप किया जाता तो कुछ हद तक पलायन और बेरोजगारी कम हो जाती और साथ ही यह सरकार की आय का जरिया भी बन जाता। अब देखने वाली बात यह होगी कि आने वाले समय में सरकार प्रदेश के अन्य पर्यटक स्थलों को इसी  तरह के पर्यटन हब में बदल पाती है या नहीं।