इस मंदिर में होती है निःसंन्तानों की मनोकामना पूर्ण।21 और 22 दिसंबर को आयोजित होगा अनुसूया मेला।

तीर्थाटन व पर्यटन का अद्भूत संगम है,अनुसूया मेला।
-मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत करेगे मेले का उद्धाटन.


      -भानु प्रकाश नेगी, देहरादून
गोपेश्वर (मंडल)ःदत्तात्रेय जंयती के शुभ अवसर पर मनाये जाने वाला सुप्रसिद्व अनुसूया मेला 21 और 22 दिसंबर को आयोजित किया जायेगा।मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत भव्य मेले का विधिवत उद्धाटन करेगें।यह जानकारी अनुसूया माता मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विनोद राणा ने दी।उन्होंने बताया कि हर साल आयोजित होने वाला यह मेला मंडल घाटी नौ गांवो के लोगों द्वारा आयोजित किया जाता है। जिससे बडे धूम-धाम से मनाया जाता है। उपाध्यक्ष राणा ने श्रृधालुओं से मेले में अधिक से अधिक संख्या में पंहुचने की अपील की है। उन्होने बताया कि सभी श्रृधालुओं के लिए मंदिर समिति व संस्थाओं की ओर से भोजन की व्यवस्था है, साथ ही मीडया और खास मेहमानों के लिए ठहरने की व्यवस्था भी की गई है। अनुसूया मेला के दौरान स्कूली बच्चों एव संस्कृति विभाग की ओर से 21 दिसंबर की रात्रि को रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किये जायेगे। मेला का मुख्य आर्कषण पांच गांवो से आने वाले देव डोलियों का मंडल बाजार में मिलन रहेगा। जहां पर हजारों भक्त माता के दर्शन कर आर्शीवाद प्राप्त करेगे।राणा ने बताया कि मेले में प्रदेश भर के अलावा देश के अनेक प्रान्तों से भी निःसंन्तान दंम्पति संन्तान प्राप्ति के लिए पंहुचते है।

क्यों  आयोजित किया जाता है अनुसूया मेला।
सती सिरोमणी माता अनुसूया को निःसंन्तानों को संन्तान देने का वरदान प्राप्त है।भगवान दत्तात्रेय जंयन्ती के अवसर पर आयोजित होने वाले इस मेले में निःसंन्तान दम्पति संन्तान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण कर जाते है। जो आज भी प्रमाणिक है। इस अवसर पर माता अनुसूया की बहिन माने जाने वाली मां ज्वाला समेत पांच देवडोलियो को अनुसूया मंदिर में बुलाया जाता है जहां एक रात्रि उनका विधिविधान से पूजा अर्चना कर विश्राम कराया जाता है, अगले दिन की शांम को विधि विधान से देव डोलियो को अपने-अपने गंतब्य स्थानों के लिए विदा किया जाता है।मंदिर परिसर में विदाई के समय देव डोलियों का मिलन बहुत ही भब्य और दर्शनीय होता है जहां माता के जयकारो के बीच देव डोलियों को हजारों भक्तों के साथ विदा किया जाता है।


कहॉ स्थित है अनुसूया माता मंदिर का मंदिर
जनपद चमोली के जिला मुख्यालय गोपेश्वर से 13 किलोमीटर की दूर मंडल गांव के दायी ओर तुंगनाथ और रूद्रनाथ के बीच 7200 फीट की उचाई पर कीलांचल पर्वत की तलहटी में सती सरोमणी माता अनुसूया का पौराणिक व भब्य मंदिर स्थित है।घने जंगलों के बीच स्थित इस मंदिर का विहंगम दृश्य बेहद आर्कषक है।इस मंदिर में देश भर से श्रृधालू निःसंन्तान दंम्पति संन्तान प्राप्ति के लिए आते है और अपनी मनोकामना पूर्ण करके जाते है।यूं तो यहां पर साल भर श्रृधालुओं का आना जाना लगा रहता है,लेकिन दत्तात्रेय जयंती के शुभ अवसर पर भक्तों व पर्यटको का तांता लगा रहता है।क्योकि यह पर्व खास माना जाता है।

र्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है अनुसूया आश्रम


अनुसूया माता मंदिर न सिर्फ निःसंन्तानो के लिए सुप्रसद्वि है बल्कि यहां से लगभग ढेड किलोमीटर की दूरी पर स्थित अत्रि मुनि(माता अनुसूया के पति)का आश्रम पर्यटकों व श्रृधालुओं के लिए सहासिक पर्यटन व आस्था के केन्द्र है। अत्रि मुनि की गुफा एक विशाल पत्थर पर स्थित है, यहां जाने के लिए लोहे की चेन के सहारे पत्थर चड़ कर पेट के सहारे बाहर निकल कर गुफा में जाना होता है। साथ विश्व एक एक मात्र जल प्रपात जो अमृतधारा के नाम से प्रसिद्व है की परिक्रमा कर बाहर निकला होता है।जो श्रृद्वा के साथ साहासिक पर्यटन का अद्भूत संगम है।यहां के अमृत कुण्ड में देव डोलियां को विशेष पर्वा व धार्मिक अनुष्ठानों के अवसर पर स्नान कराया जाता है।इस अमृत जलधारा का के पानी को गोपेश्वर बाजार व आस पास के गांवों को सप्लाई किया जाता है।