भारी उपेक्षा से अंशकालिक शिक्षकों में रोष,शासन प्रशासन पर लगायें घोर लापरवाही के आरोप

// भानु प्रकाश नेगी//

रूद्रप्रयाग (अगस्त्यमुनी)

वर्ष 1986-89 में राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षकों को पूर्ण वरिष्ठता से नियुक्ति न मिलने पर अंश कालिक शिक्षा संध ने भारी रोष जताया है। अंशकालिक शिक्षक संर्धष समिति के अध्यक्ष प्रदीप राणा ने बताया कि शिक्षकों का यह प्रकरण 1986-89 चल रहा है,लेकिन विभाग और शासन की घोर लापरवाही और अनदेखी के चलते अभी तक इस पर कोई ठोस कार्यवाही नही हो पायी है।

प्रदीप राणा का कहना है कि, तत्कालीन उत्तर प्रदेश विधानसभा में हमारी नियुक्तियों की धोषणा की गई थी, लेकिन मुलायम सिंह व अन्य नेताओं ने जान बूझकर इन स्थाई नियुक्तियें मे अवरोध पैदा किया,जिससे यह कार्य आज तक लम्बित पडा हुआ है। साथ ही उस समय गठित प्रकाश कमेटी और मंत्री परिषद कमेटी का भी अभी तक कोई निर्णय नही आया है। उन्होनें आरोप लगाया कि अभी तक की सरकारों व विभागीय लापरवाही के कारण आज अंशकालिक शिक्षकों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। प्रदीप राणा वर्तमान सरकार से लेकर भारत के राष्ट्रपति तक को ज्ञापन दे चुके है लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्यवाही इस दिसा में नही हो पायी है।


गौरतलब है कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार में पर्वतीय मूल के सभी विधायकों ने उत्तरांचल विकास मंत्री,उत्तर प्रदेश शासन लखनउ,राज्य मंत्रीगण,उत्तरांचल विकास विभाग,सांसदगण उत्तरांचल क्षेत्र को उत्तरांचल के नियुक्ति से वंचित शिक्षक/शिक्षिकाओं के समायोजन के लिए आवश्यक कार्यवाही हेतु ज्ञापन सौपा था। जिसमें प्रमुख रूप से निम्न लिखित मांगो का उल्लेख किया गया था। -राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में 1986 से लेकर 89 तक पर्वतीय क्षेत्रों में अंशकालिक व्यवस्था के तहत प्रवक्ता/एलटी पदां पर नियुक्ति की गई थी.
-वर्ष 1990-91 में शिक्षण अनुभव का लाभ देकर इन्ही अंशकालिक शिक्षिकों को समायाजित करने की भावना से तर्दर्थ नियुक्ति दी गयी थी।जिसमें से कुछ अंशकालिक शिक्षक नियुक्ति पाने से वंचित रह गये थे।
-सितंम्बर 1992 में इन अंशकालिक शिक्षिकों को समायोजित करने हेतु पूर्व शासनकाल में मंत्री परिषद में रखा गया था लेकिन इन्हें अंशकालिक चिकित्सकों से सम्बद्व करने के कारण अंतिम निर्णय नही हो पाया।
आदि मांगों पर जल्द कार्यवाही और न्याय दिलाने की अपील की गई थी।उत्तराखण्ड लोकायुक्त ने भी अंशकालिक शिक्षकों की मांग को न्याय संगत मानते हुये इन्हें पूर्णकालिक शिक्षक में समायोजित करने की संस्तुती की है। लेकिन वर्तमान सरकार भी अभी तक इस मामले में अपना रूख साफ नही कर पायी है जो अंशकालिक शिक्षकों के लिए परेसानी का सबब बना हुआ है।


प्रदेश में दिन प्रतिदिन सरकारी शिक्षा की हालत खराब होती जा रही है। प्रायमरी से लेकर माध्यमिक स्कूलों में छात्र-छात्राओं का टोटा साफ तौर पर देखा जा सकता है। सरकार ने गणुवक्ता पूर्ण शिक्षा के लिए आर्दश स्कूलों की स्थापना कर तो दी है लेकिन इन स्कूलों में शिक्षकों के आभाव में विद्यार्थी प्रायवेट स्कूलों की ओर रूख कर रहे है। वही दूसरी ओर कई दसकों से अपने अधिकारों के लिए संर्धष कर रहे अंशकालिक शिक्षकों को अभी तक पूर्णकालिक शिक्षक नही बनाया गया है, जो शिक्षा विभाग और अभी तक के शासन की कार्यप्रणाली पर बडा प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है।