पशु प्रेमियों के लिए यह खबर चौकाने वाली है।

जानवरों के काटने पर रेबीज के टीके से ही बच सकती है जिन्दगी।

अगर आप पशु प्रेमी है और लापरवाही से अपने पालतु जानवरों के साथ खेलते है और उन्हें नियमित तौर पर रेबिज का टीकाकरण नही कराते है तो आपका पशु प्रेम आपके के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। यह जानकारी कोरोनेसन अस्पताल में एक जन जागरूक कार्यक्रम के दौरान प्रो.डॉ.जे.एस हंसपाल ने दी।

डॉ हंसपाल ने दी रेबीज की महत्वपूर्ण जानकारी
जन जागरूकता के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. हंसराज ने महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि आम तौर पर लोग जानवरों (कुत्ता,बिल्ली,बन्दर,आदि) के काटने को गंभीरता से नही लेते है और कई बार घरेलू उपचार करते है। इतना तक कि पालतू जानवरों के काटने को गंम्भीरता से नही लेते है और रेबीज का टीका नही लगाते है,जिसका परिणाम यह होता है कि उन्हें कुछ समय बाद गंदी मौत का सामना करना पडता है। उन्होनें बताया कि यदि घरेलू जानवरों का पूर्ण टीकाकरण न हो तो उनके चाटने पर भी रेबीज हो सकता है क्यांकि कई हमें साधारण तौर पर अपनी आंखो से यह पता नही चलता कि हमारी कोशिकोओं का कौन सा भाग खुला हुआ है।


क्या कहते है आंकडें !
उन्होंने बताया कि रेबीज से प्रभावित इंसान के काटने से भी रेबीज हो सकता है।क्योंकि कई बार यह रोग 10 से अधिक साल के बाद भी उभर कर आ सकता है।डॉ.हंसपाल ने बताया कि 15 मिलियन लोगों को प्रत्येक दिन जानवर काटते है। जिसमें 17 हजार घटनायें भारत में होती है। हर दो सेकेण्ड में एक जानवर इंसान को काटता है,हर आधा घंटे में जानवरों के काटने एक आदमी की मौत होती है।उत्तराखंड में जानवरों के काटने का ताजा आंकडा मौजूद नही है। 2030 तक रेबीज मुक्त भारत का लक्ष्य रखा गया है।गुजरात और दक्षिण भारत रेबीज मुक्त हो चुका है। जानवरों के काटने के इंजेक्सन पहले से भी लगाये जा सकते है जिसमें पहला टीका काटने के तुरन्तु बाद कुछ धंटो में, दूसरा सातवे दिन,और तीसरा टीका 21 दिन के बाद लगाया जाता है।रेबीज होने वाली मौतों में अधिकतर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की होती है। जिसका मुख्य कारण जन जागरूकता की कमी है।


जानवरों के काटने के बाद क्या करें क्या ना करें!
जानवरों के काटने के तुरन्तु बाद काटे स्थान पर तेज पानी की धार लगाने चाहिए,उसके बाद झागदार साबुन से अच्छी तरह से धोना चाहिए,ओर फिर एंटीसेटिक लगाना चाहिए।ऐसा करने से रेबीज के जीवाणु की संभावना आधी से कम रह जाती है। जानवरों के काटने के बाद लाल मिर्च, गोबर,कई प्रकार के मलहम आदि नही लगाना चाहिए। साथ ही धाव वाले स्थान को खुला छोडना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान कोरोनेसन अस्पताल के सीएमएस डॉ पुनेठा ने बताया कि जानवरों को पालना अच्छी बात है लेकिन उनका नियमित टीकाकरण और काटने पर लापरवाही बिल्कुल नही करनी चाहिए। क्योकि रेबीज का टीकारण न होने से इंसान की बहुत गंदी मौत होती है। हमें समाज में जागरूता फैलाने की अति आवश्यकता हैं। उन्होनें आयोजक टीम की सरहाना करते हुऐ कहा कि इस तरह के जन-जागरूकता के कार्यक्रम समय समय पर होने चाहिए ताकि रेबीज मुक्त भारत का सपना साकार हो सके।

कार्यक्रम के संयोजक सीनियर फिजिशिन डॉ अजीज गैराला ने बताया कि भारत में हर साल रैबीज से मरने वाले मरीजों की संख्या अभी भी तीस हजार है जो चिन्ता का विषय है। भारत सरकार ने रेबीज से मुक्त के लिए 2030 तक का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन इससे पहले हमें जन-जागरूकता के माध्यम से इस आंकडे को तेजी कम करने की आवश्यकता है जिसमें जन सहभागिता व सहयोग की आवश्यकता है। जिसके लिए हम अथक प्रयास में लगे हुऐ है। उन्होंने ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अस्पताल के सभी सहयोगी डॉक्टरों व स्टॉफ का आभार व्यक्त किया।
     -भानु प्रकाश नेगी