देवभूमि में महिलाओं के शराब पीने का विडियों से उत्तराखंड की धरती शर्मसार

सोशल मीडिया पर पहाड़ी महिलाओं द्वारा बच्चों को गोद में लेकर पी जा रही शराब घोर निन्दनीय है।देवभूमि की मान -मर्यादा,आन -बान- शान के खिलाफ है। इस अपराध के लिए जितनी दोषी ये महिलायें है उतनी ही दोषी अभी तक की सरकारें भी है जिन्होनें सरकारी खजाने और अपनी कमीशन के लिए बुनियादी सुविधाओं से ज्यादा शराब को घर-घर पंहुचाना आवश्यक समझा।जो बदस्तूर अभी तक जारी है दुर्भाग्यपूर्ण स्थित यह है कि वर्तमान सरकार ने शराब के कारोबार से ज्यादा राजस्व बडाने का लक्ष्य रखा है।
पहाडों मे शराब के विरोध के लिये कुछ संस्थाओं ने प्रयास तो किया है लेकिन वो अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पायी है क्योंकि उनका ध्यान शराब विरोध से ज्यादा अखबारों की सुर्खियां बनने मे रहा है। समाज के बुद्दिजीवियों ने इन संस्थाओं की महिलाओं के शराब विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जो अपने पतियों की शराब नही छुडा पाये वो औरों की शराब कैसे छुडा पायेगी?


बहरहाल महिलाओं का प्रयास तो अच्छा था, लेकिन जब सरकारों को जनता के स्वास्थ्य से ज्यादा शराब की बिक्री की चिन्ता हो तो देवभूमि में यह मंजर भी देखा जाना लाजमी है।

रही बात विडियो के वायरल होने की तो आज के सूचना क्रांति के समय में किसी को रोकना बहुत कठिन है।लेकिन सरकारो को इस ओर प्रयास करना चाहिये ताकि समाज मे गलत संदेश न जाये।साथ ही इन महिलाओं पर दण्डात्मक कार्यवाही भी आवश्यक है जिन्होनें इस तरह का गलत काम किया है।

-भानु प्रकाश नेगी,देहरादून।।